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वार्षिक पर्वो में प्रमुख पर्वो पर भगवान के विशेष पूजन, उत्सव व श्रृंगार होते है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार को भगवान के विभिन्न स्वरूपों की सवारी (चल समारोह) निकाली जाती है। मराठा (सिंधिया) राज्य के समय श्रावण शुक्ल से भाद्रपद कृष्ण तक प्रत्येक सोमवार को एक-एक झांकी बढ़ाते हुए सवारी निकाली जाती थी, अब लगभगसन् 1967 (सं. 2024 वि.) से श्रावण कृष्ण से लेकर भाद्रपद कृष्ण तक सभी सोमवार को पालकी,गरुड, नंदी, रथ एवं हाथी एकोत्तार बढ़ाते हुए भगवान के विभिन्न स्वरुपसुसज्जित झांकियों के साथ सवारी निकालने की परंपरा है। भाद्रपद कृष्ण के अंतिम सोमवार को सवारी का भव्य स्वरूप और भक्तों-दर्शकों की भीड़ नगर में समाती ही नहीं है।

नागपंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को शिखर के तीसरे तल पर नाग के आसन पर स्थित शिव-पार्वती की सुन्दर प्रतिमा के दर्शन लाखों धर्मप्राण जनता वर्ष में एक ही बार करती है। पूरे श्रावण मास में धर्म-प्राण जनता जल, दूध, दही, घृत् शकर, शहद, चन्दन अक्षत से पूजन करती है और संकल्पानुसार संख्या में बिलपत्र चढ़ाती है।आश्विन कृष्ण पक्ष में उमा सांझी महोत्सव और शुक्ल पक्ष में विजयादशमी पर महाकालेश्वर की राजसी सवारी नगर और सीमा के बाहर दशहरा मैदान जाती है, वहाँ शमी वृक्ष की शाखा (डाली) की पूजन, सीमा पूजा, अपराजिता देवी की पूजन विधि विधान से सम्पन्न होती है। कार्तिकमास में (कार्तिक शुक्ल पक्ष से मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष मे) प्रत्येक सोमवार को महाकालेश्वर की सवारी (पालकी में महाकालेश्वर की प्रतिमा) मंदिर से शिप्रा नदी